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Thursday, July 31, 2008

बड़ों का सम्मान

पुत्र : मां, आज सुबह जब मैं पापा के साथ बस में आ रहा था तो उन्होंने एक औरत के लिये मुझसे अपनी सीट छोड़ने को कहा। मां : बेटा, ये तो अच्छी बात है। बड़ों का सम्मान करना चाहिये। पुत्र : मगर मां, मैं तो पापा की गोद में बैठा हुआ था।

Wednesday, July 30, 2008

सचमुच अंधा

पत्नी अपने पति को अपने साथ बाजार में घटी एक घटना का विवरण सुना रही थी - ''एक भिखारी की गर्दन में तख्ती लटक रही थी जिस पर लिखा था ''जन्म से अंधा''। मैंने उसे एक रूपया दिया तो जानते हो उसने क्या कहा ?''''क्या कहा ?'' पति ने पूछा । ''उसने कहा - हे सुन्दरी भगवान तुम्हें खुश रखे। अब तुम्हीं बताओ उसे कैसे मालूम हुआ कि मैं सुन्दरी हूं।'' ''तब तो वह सचमुच अंधा ही होगा'' - पति ने जवाब दिया।

Tuesday, July 29, 2008

30 साल छोटी पत्नी

30 साल छोटी पत्नी

एक दंपत्ति अपनी शादी की चालीसवीं वर्षगांठ मना रहे थे। संयोग से उस दिन पत्नी का साठवां जन्मदिन भी था। उस रात उनके घर में एक परी प्रकट हुई। उसने उन दोनों से कहा कि वे दोनों इतने लम्बे समय से बड़े प्यार से रह रहे हैं जिससे वह बहुत खुश है। परी ने कहा कि वे उससे एक एक वरदान मांग सकते हैं।
पत्नी, जो कि अपने पति से बेइंतहा प्यार करती थी, ने परी से कहा कि वह अपने पति के साथ दुनिया की सारी मनोरम जगहों की सैर करना चाहती है, पर उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। परी ने अपनी छड़ी घुमाई और पत्नी के हाथ में हवाई जहाज के टिकटों से भरा लिफाफा आ गया।
अब मांगने की बारी पति की थी। उसने एक मिनट सोचा फिर बोला - ''ईमानदारी से कहूं, तो मैं अपने लिये अपने से 30 साल छोटी पत्नी चाहता हूं।''परी ने अपनी छड़ी घुमाई और .......... । पति महोदय तुरंत 90 साल के हो गये।

30 साल छोटी पत्नी

30 साल छोटी पत्नी

एक दंपत्ति अपनी शादी की चालीसवीं वर्षगांठ मना रहे थे। संयोग से उस दिन पत्नी का साठवां जन्मदिन भी था। उस रात उनके घर में एक परी प्रकट हुई। उसने उन दोनों से कहा कि वे दोनों इतने लम्बे समय से बड़े प्यार से रह रहे हैं जिससे वह बहुत खुश है। परी ने कहा कि वे उससे एक एक वरदान मांग सकते हैं।
पत्नी, जो कि अपने पति से बेइंतहा प्यार करती थी, ने परी से कहा कि वह अपने पति के साथ दुनिया की सारी मनोरम जगहों की सैर करना चाहती है, पर उसके पास इतने पैसे नहीं हैं। परी ने अपनी छड़ी घुमाई और पत्नी के हाथ में हवाई जहाज के टिकटों से भरा लिफाफा आ गया।
अब मांगने की बारी पति की थी। उसने एक मिनट सोचा फिर बोला - ''ईमानदारी से कहूं, तो मैं अपने लिये अपने से 30 साल छोटी पत्नी चाहता हूं।''परी ने अपनी छड़ी घुमाई और .......... । पति महोदय तुरंत 90 साल के हो गये।

Monday, July 28, 2008

सबसे अच्छा प्रतिशोध

सबसे अच्छा प्रतिशोध

''पांच सौ बाइस रूपये, मैडम'', दुकानदार ने सामान पैक करते हुये कहा । महिला ने जब पैसे निकालने के लिये अपना पर्स खोला तो दुकानदार ने लक्ष्य किया कि उसके पर्स में टीवी का रिमोट भी रखा हुआ है। ''तो आप टीवी का रिमोट भी साथ लेकर ही चलती हैं।'' दुकानदार ने मुस्कुराते हुये कहा । ''नहीं'' महिला ने जवाब दिया, ''लेकिन मेरे पति ने जब मेरे साथ बाजार चलने से मना कर दिया तो मैंने सोचा कि यही सबसे अच्छा प्रतिशोध है जो मैं उससे ले सकती हूं।''

Sunday, July 27, 2008

स्वीमिंग पूल

स्वीमिंग पूल

एक आदमी ने अपने घर फोन किया तो उधर से एक अनजान महिला की आवाज आई। ''कौन ?'' - आदमी ने पूछा। ''मैं घर की नौकरानी बोल रही हूं ।'' - महिला ने उत्तर दिया। ''लेकिन हमारे घर में तो कोई नौकरानी नहीं है।'' - आदमी ने कहा। ''मुझे घर की मालकिन ने आज सुबह ही नौकरी पर रखा है ।'' नौकरानी ने जवाब दिया। ''अच्छा ठीक है, सुनो। इस वक्त तुम्हारी मालकिन कहां हैं ? मुझे उनसे बात करनी है।'' - आदमी ने कहा । ''वह तो बेडरूम में हैं। अपने पति के साथ।'' - नौकरानी ने जवाब दिया। ''क्याऽऽऽ... ? पति के साथ...... ? पर उसका पति तो मैं हूं ........ '' - आदमी गुस्से से भन्ना गया। उसने एक मिनट कुछ सोचा फिर बोला - ''हैलो ..... सुनो क्या तुम पचास हजार रूपये कमाना चाहोगी?''''हां... । पर मुझे करना क्या होगा ?'' - नौकरानी ने पूछा । ''तुम मेरी अलमारी से बंदूक निकालो और उस कुतिया और उसके साथ जो आदमी है उसे गोली से उड़ा दो।''नौकरानी ने फोन नीचे रख दिया। आदमी ने पहले कदमों की और फिर दो गोलियां चलने की आवाज फोन पर सुनी। नौकरानी ने वापस फोन उठाया और पूछा - ''अब इन लाशों का क्या करूं ?''''उन्हें स्वीमिंग पूल में डाल दो।'' - आदमी ने कहा । ''पर आपके घर में तो स्वीमिंग पूल नहीं है।'' - नौकरानी ने जवाब दिया। लगभग तीन चार मिनट तक दोनों तरफ खामोशी छाई रही फिर आदमी की आवाज आई - ''क्या ये नम्बर 7457965 ही है ?''

Saturday, July 26, 2008

दो मादा और तीन नर

एक महिला रसोई में पहुंची तो देखा कि उसका पति जाली हाथ में लिए हुए घुमा रहा था। ''ये तुम क्या कर रहे हो ?'' - पत्नी ने उससे पूछा । ''मक्खियां मार रहा हूं।'' - पति ने जवाब दिया। ''अच्छा ! एकाध मार पाये?'' - पत्नी ने पूछा। ''तीन ! दो मादा और तीन नर ।'' - पति ने कहा। विस्मित होते हुये पत्नी ने पूछा - ''ये कैसे मालूम पड़ा ?''''तीन शराब की बोतल पर थीं और दो फोन पर'' - पति ने जबाब दिया।

Friday, July 25, 2008

दो रूमाल और 50,000 रूपये

एक दंपत्ति की शादी को साठ वर्ष हो चुके थे। उनकी आपसी समझ इतनी अच्छी थी कि इन साठ वर्षों में उनमें कभी झगड़ा तक नहीं हुआ। वे एक दूजे से कभी कुछ भी छिपाते नहीं थे। हां, पत्नी के पास उसके मायके से लाया हुआ एक डब्बा था जो उसने अपने पति के सामने कभी खोला नहीं था। उस डब्बे में क्या है वह नहीं जानता था। कभी उसने जानने की कोशिश भी की तो पत्नी ने यह कह कर टाल दिया कि सही समय आने पर बता दूंगी।
आखिर एक दिन बुढ़िया बहुत बीमार हो गई और उसके बचने की आशा न रही। उसके पति को तभी खयाल आया कि उस डिब्बे का रहस्य जाना जाये। बुढ़िया बताने को राजी हो गई। पति ने जब उस डिब्बे को खोला तो उसमें हाथ से बुने हुये दो रूमाल और 50,000 रूपये निकले। उसने पत्नी से पूछा, यह सब क्या है। पत्नी ने बताया कि जब उसकी शादी हुई थी तो उसकी दादी मां ने उससे कहा था कि ससुराल में कभी किसी से झगड़ना नहीं । यदि कभी किसी पर क्रोध आये तो अपने हाथ से एक रूमाल बुनना और इस डिब्बे में रखना।
बूढ़े की आंखों में यह सोचकर खुशी के मारे आंसू आ गये कि उसकी पत्नी को साठ वर्षों के लम्बे वैवाहिक जीवन के दौरान सिर्फ दो बार ही क्रोध आया था । उसे अपनी पत्नी पर सचमुच गर्व हुआ।
खुद को संभाल कर उसने रूपयों के बारे में पूछा । इतनी बड़ी रकम तो उसने अपनी पत्नी को कभी दी ही नहीं थी, फिर ये कहां से आये?
''रूपये! वे तो मैंने रूमाल बेच बेच कर इकठ्ठे किये हैं ।'' पत्नी ने मासूमियत से जवाब दिया।

Wednesday, July 23, 2008

मेरा अधिकार होगा या मशीन का ?''

पति-पत्नी में झगड़ा हुआ और बात तलाक तक पहुंच गई। लेकिन पहले फैसला बच्चे के बारे में होना था कि वह किसके पास रहेगा। न्यायाधीश ने पहले पत्नी से पूछा कि वह कोई एक वजह बताये जिस कारण बच्चा उसे दिया जाना उचित हो । पत्नी ने कहा - ''मैने उसे नौ महीने गर्भ में रखा है और बड़े कष्ट झेलकर उसे जन्म दिया है। यह बच्चा मेरे शरीर का हिस्सा है। उस पर सिर्फ और सिर्फ मेरा ही अधिकार है।''न्यायाधीश हांलाकि उसकी बात से प्रभावित हुये लेकिन नियम के अनुसार पति से भी वही प्रश्न किया। पति ने जवाब दिया - ''देखिये, यदि मैं कोला (शीतल पेय) की मशीन में एक सिक्का डालता हूं और एक गिलास कोला निकल कर बाहर आता है तो आप ही बताइये उस कोला पर मेरा अधिकार होगा या मशीन का ?''

Tuesday, July 22, 2008

मजबूरन

इंटेलिजेंस ब्यूरो में एक उच्च पद हेतु भर्ती की प्रक्रिया चल रही थी। अंतिम तौर पर केवल तीन उम्मीदवार बचे थे जिनमें से किसी एक का चयन किया जाना था। इनमें दो पुरुष थे और एक महिला। फाइनल परीक्षा के रूप में कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा की जांच की जानी थी। पहले आदमी को एक कमरे में ले जाकर परीक्षक ने कहा - ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगे चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।'' फिर उसने उसके हाथ में एक बंदूक पकड़ाई और दूसरे कमरे की ओर इशारा करते हुये कहा - ''उस कमरे में तुम्हारी पत्नी बैठी है। जाओ और उसे गोली मार दो।''''मैं अपनी पत्नी को किसी भी हालत में गोली नहीं मार सकता''- आदमी ने कहा। ''तो फिर तुम हमारे किसी काम के नहीं हो। तुम जा सकते हो।'' - परीक्षक ने कहा।
अब दूसरे आदमी को बुलाया गया। ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगे चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो।'' कहकर परीक्षक ने उसके हाथ में एक बंदूक पकड़ाई और दूसरे कमरे की ओर इशारा करते हुये कहा - ''उस कमरे में तुम्हारी पत्नी बैठी है। जाओ और उसे गोली मार दो।'' आदमी उस कमरे में गया और पांच मिनट बाद आंखों में आंसू लिये वापस आ गया। ''मैं अपनी प्यारी पत्नी को गोली नहीं मार सका। मुझे माफ कर दीजिये। मैं इस पद के योग्य नहीं हूं।''
अब अंतिम उम्मीदवार के रूप में केवल महिला बची थी। उन्होंने उसे भी बंदूक पकड़ाई और उसी कमरे की तरफ इशारा करते हुये कहा - ''हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि तुम हर हाल में हमारे निर्देशों का पालन करोगी चाहे कोई भी परिस्थिति क्यों न हो। उस कमरे में तुम्हारा पति बैठा है। जाओ और जाकर उसे गोली से उड़ा दो।'' महिला ने बंदूक ली और कमरे के अंदर चली गई। कमरे के अंदर घुसते ही फायरिंग की आवाजें आने लगीं । लगभग 11 राउंड फायर के बाद कमरे से चीखपुकार, उठापटक की आवाजें आनी शुरू हो गईं। यह क्रम लगभग पन्द्रह मिनटों तक चला उसके बाद खामोशी छा गई। लगभग पांच मिनट बाद कमरे का दरवाजा खुला और माथे से पसीना पोंछते हुये महिला बाहर आई। बोली - ''तुम लोगों ने मुझे बताया नहीं था कि बंदूक में कारतूस नकली हैं। मजबूरन मुझे उसे पीट-पीट कर मारना पड़ा।''

Monday, July 21, 2008

खुलने और बन्द होने वाली दीवाल

एक ग्रामीण पिता-पुत्र अपने नजदीकी शहर में शॉपिंग मॉल देखने गये। यूं तो वहां की हर चीज देखकर वे चकित थे परन्तु एक जगह एक खुलने और बन्द होने वाली दीवाल (लिफ्ट) देखकर वे विशेष रूप से प्रभावित हुये। उन्होंने ऐसी दीवाल पहले कभी नहीं देखी थी । जिस समय वे पिता पुत्र आंखे फाड़ फाड़ कर उस दीवाल को देख रहे थे उसी समय एक बूढ़ी औरत उस दीवाल के पास पहुंची और दीवाल पर लगा एक बटन दबाया। बटन दबाते ही दीवाल खुल गई और बूढ़ी औरत उस दीवाल के अन्दर चली गई । दीवाल फिर बन्द हो गई। थोड़ी देर बाद दीवाल अपने आप खुली और उसमें एक पच्चीस साल की खूबसूरत लड़की बाहर निकली। पिता यह सब देखकर लगभग चिल्लाते हुये पुत्र से बोला - ''बेटा, जल्दी घर जा और अपनी मां को लेकर आ।''

Sunday, July 20, 2008

शादी की पचासवीं सालगिरह

एक पति पत्नी अपनी शादी की पचासवीं सालगिरह मना रहे थे कि अचानक पति रोने लगा । पति को रोते देख पत्नी ने कारण पूछा । पत्नी की आंखों में देखते हुये पति बोला - ''प्रिये क्या तुम्हें याद है आज से पचास साल पहले तुम्हारे पिता ने हमें तुम्हारे घर के पीछे वाले बगीचे में छुपकर मिलते हुये रंगे हाथों पकड़ा था ?''पत्नी के ''हां'' कहने पर पति ने पूछा कि क्या उसे याद है कि उस वक्त उसके पिता ने मुझसे क्या कहा था ? क्या कहा था । मुझे याद नहीं आ रहा । - पत्नी ने जवाब दिया। उन्होनें कहा था कि अगर मैंने तुमसे शादी नहीं की तो वे मुझे पचास सालों के लिये जेल में डलवा देंगे। तो क्या हुआ । तुमने तो शादी कर ली ना । पत्नी ने पति की ओर देखते हुये कहा। यही तो सोच रहा हूं कि अगर मैंने उनकी बात नहीं मानी होती तो कम से कम आज मैं आजाद हो गया होता ।

Saturday, July 19, 2008

याददा6त

एक वृद्ध दंपति को लगने लगा कि उनकी याददा6त कमजोर हो चली है। यह सुनि6चित करने के लिये कि उन्हें कुछ नहीं हुआ है, वे डॉक्टर के पास गये। डॉक्टर ने बारीकी से उनका परीक्षण किया और बताया कि उन्हें कोई बीमारी नहीं है। बुढ़ापे में इस तरह के लक्षण स्वाभाविक हैं। उसने उन्हें महत्वपूर्ण कार्यों को लिखकर रखने की सलाह दी ताकि वे कोई जरूरी काम न भूलें। वृद्ध दंपति ने डॉक्टर का धन्यवाद किया और घर चले गये। उस रात को टीवी देखते समय पति उठकर कहीं जाने लगा तो पत्नी ने पूछा - ''कहां जा रहे हो ?'' उसने जवाब दिया - ''रसोईघर में''। ''मेरे लिये एक कप चाय लाओगे ?'' - पत्नी ने कहा। ''ठीक है, ले आऊंगा।'' ''मेरे खयाल से तुम इसे नोट कर लो नहीं तो भूल जाओगे।'' पत्नी ने कहा। ''नहीं भूलूंगा, प्रिय'' - पति ने जवाब दिया। ''ठीक है, मेरे लिये कुछ खाने को भ्आना। जैसे अालू चिप्स'' । ''ठीक है , ले आऊंगा।'' ''मुझे लगता है तुम लिख लेते तो ठीक था। कहीं भूल न जाओ।'' पत्नी ने फिर आग्रह किया। ''नहीं भूलूंगा प्रिय । मुझे तुम्हारे लिये एक कप चाय और आलू चिप्सहै । ठीक है ऌतना तो मैं याद रख ही सकता हूं। '' लगभग आधे घण्टे बाद पति महोदय एक कटोरे में आइसक्रीम और एक प्लेट में आमलेट लेकर हाजिर हुये। पत्नी यह देखते ही आग बबूला होते हुये चिल्लाई - ''तुमसे कहा था कि लिखकर ले जाओ वरना भूल जाओगे। बताओ मेरे आलू के परांठे कहां है ?''

Friday, July 18, 2008

गरीबी क्या न कराए

एक प्रसिध्द लेखक ने एक बार अपने भाषण में कहा - मेरा बचपन बहुत ही गरीबी में बीता । हम लोग इतने गरीब थे कि घर की सुरक्षा के लिए एक कुत्ता भी नहीं पाल सकते थे। इसलिए रात के समय जब भी कोई आहट होती हमें स्वयं ही भौंकना पड़ता था ..... ।

Monday, July 7, 2008

प्रिये, है ये प्रेम, नहीं है झगड़ा

प्रिये, है ये प्रेम, नहीं है झगड़ा
आओ यूँ सुलझाएँ अपना रगड़ा

जिंदगानी के चंद चार क्षणों में
ऊपर नीचे होते रहना है पलड़ा

करम धरम तो दिखेंगे सबको
चाहे जित्ता डालो उस पे कपड़ा

जब खत्म होगी सुखद होगी
यूँ पीड़ा को रखा हुआ है पकड़ा

जिया है जिंदगी को बहुत रवि
मौत कैसी है ये असली पचड़ा

बड़ी उम्मीदों से आए थे

अवाम को आईना आखिर देखना होगा
हर शख्स को अब ग़ज़ल कहना होगा

यही दौर है यारो उठाओ अपने आयुध
वरना ता-उम्र विवशता में रहना होगा

बड़ी उम्मीदों से आए थे इस शहर में
लगता है अब कहीं और चलना होगा

जमाने ने काट दिए हैं तमाम दरख़्त
कंटीली बेलों के साए में छुपना होगा

इश्क में तुझे क्या पता नहीं था रवि
फूल मिलें या कांटे सब सहना होगा

मंत्री बनाओ तो कोई बात बने

एमपी, एमएलए बनाओ तो कोई बात बने
मंत्री, महोदय पुकारो तो कोई बात बने

चोर लुटेरा न पुकारो मुझे मेरे वोटरों
मुझे चुन के दिखाओ तो कोई बात बने

औरों के भाषण पिए जा रहे हो कबसे
थोड़ा मुझको भी सुनलो तो कोई बात बने

जमाने से दूसरों को वोट फेंकने वालो
अबकी मुझको जिताओ तो कोई बात बने

कुर्सी के लिए सूख के खार हो गए
कोई पद प्रतिष्ठा दिलाओ तो कोई बात बने

पार्टी पब्लिक को फिर कौन पूछे रवि
हमें चुन के बिठाओ तो कोई बात बने

वसंत आया लगता है

लौट के क्यों वसंत आया लगता है
वही फिक्र ले वसंत आया लगता है

इस जमीं का पतझड़ गया ही नहीं
कोई ख्वाब में वसंत आया लगता है

भोंपू, भाषण, रैलियाँ, आम सभाएँ
वो पाँच साला वसंत आया लगता है

नयी हवा नहीं न नए कायदे हुए
ये बे फ़जूल वसंत आया लगता है

मंदिर मस्जिद हिंदू मुस्लिम फसाद
वक्त बे-वक्त वसंत आया लगता है

ठंड से न भूख से मौत की खबर थी
क्या सचमुच वसंत आया लगता है

ज़र्द पत्ते छाएँ हैं गुलों के मौसम में
इलाही, नया वसंत आया लगता है

बुझे चेहरों की शमा फिर जली रवि,
ये बे-मौसम वसंत आया लगता है